हर ख़ुशी खफा खफा थी
हर तलाश जार जार थी,
इन तन्हाइयों के साये में
खुद के मौजूदगी की तलाश थी,
अब जो मिले हो,
होश में आना कोई क्यूँ चाहेगा
की रहने दो बेहोश मुझे
तुम्हारे कदमों के साये साये....
हर तलाश जार जार थी,
इन तन्हाइयों के साये में
खुद के मौजूदगी की तलाश थी,
अब जो मिले हो,
होश में आना कोई क्यूँ चाहेगा
की रहने दो बेहोश मुझे
तुम्हारे कदमों के साये साये....
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